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Indian Art And Culture Handwritten Notes || भारतीय कला एव संस्कृति

Indian Art And Culture PDF For Competitive Exams

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Indian Art and Culture In Hindi || भारतीय कला का महत्व

Good Afternoon friends Art And Culture Handwritten Notes In Hindi, important aspects of indian art and culture, प्राचीन भारत की कला एवं संस्कृति को लेकर आज हमने ये विशेष लेख तैयार किया है सिर्फ आपके लिए ताकि आपको भारतीय कला और संस्कृति के बारे में कुछ और जानकारिया दे पाए। आज के इस विशेष लेख में indian art and culture में किस प्रकार के वस्त्र का प्रयोग कहा कहा पर और किस किस प्रकार से पहने जाते है। और उनका हमारे भारतीय संस्कृति में क्या महत्व है तथा महिलाओ और पुरुषो दोनों के वस्त्रो के बारे में कुछ और विशेष जाकारिया साझा की है जो सायद आपो पता भी नहीं होगी । भारत में कला एवं संस्कृति का क्या महत्व में ये भी आपको समझ में आ जायेगा और नसे जुड़े प्रश्न भी आपके परीक्षाओ में आते है ।

Art And Culture Handwritten Notes In Hindi

भारत में किस प्रयोग में लिए जाने व्यंजनों के बारे में भी कुछ जानकारिया आपसे आज साझा की है हमने की हमारे भारत देश मे परम्परागत रूप से कोनसे कोनसे व्यंजनों या भोजन का प्रयोग किया जाता जाता है भारतीय कला की विशेषताएं क्या है इसकेबारेme भी आप जान पाएंगे। हमारा देश भर भारतीय कला और संस्कृति के लिए पुरे विश्व  में प्रसद्ध है और पुराने समय में भी जकाफी विदेशियों ने भी भारतीय वयंजनो की प्रसंशा की है Indian Art And Culture Handwritten Notes In Hindi आपके लिए ही ये सभी हस्तलिखित नोट्स बनाये गए है। और ये आपके परक्षा के तयारी में आपका सहयोग करेंगे। इस दृस्टि से भी देखा जाए तो भी ये आपके लिए काफी महत्वपूर्ण है ।

Indian Art And Culture NCERT

Indian Art And Culture Handwritten Notes || भारतीय कला एव संस्कृति

Handwritten Notes In Hindi

भारतीय परम्परा एवं रीति रिवाज

हमारे देश भारत में अगर किसी का अभिनन्दन या अभिवादन करना हो तो हम सामान्य रूप से नमस्कार, नमस्ते या फिर नमस्कारम जैसे आदरणीय शब्दों का प्रयोग करते है वैसे तो नमस्कार शब्द को नमस्ते शब्द की तुलना में हम लोग नमस्कार शब्द का प्रयोग करना ज्यादा औपचारिक मानते है और ये दोनों ही शब्द बहुत ही आदरणीय और सम्मान शब्दों के सूचक है और आम तौर पर इन शबो का प्रयोग भारत और नेपाल में हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म लोग ज्यादातर प्रयोग करते हैं, और काफी लोग तो इन शब्दों का प्रयोग भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर भी प्रयोग में लेते है। और जैसा की हम सब लोग जानते है की भारतीय और नेपाली संस्कृति में इन शब्दों का प्रयोग लिखित या फिर मौखिक रूप से बोलचाल की भाषा के सुरुवात में प्रयोग में लेते है ओर जब किसी को विदा किया जाता है

 

 

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Art And Culture Notes | भारतीय कला का परिचय भाग-1

तब भी हम लोग बिना कुछ बोले हाथ जोड़ कर इस स्थति या इस मुद्रा में रहते है और कभी कभी इस मुद्रा के साथ में इन भी करते है।अगर इन शब्दों के अर्थ को समझा योग में, योग गुरु और योग के शिष्यों के द्वारा कही जाने वाली बात के आधार पर नमस्ते का अर्थ “होता है की मेरे भीतर की रोशनी तुम्हारे अन्दर की रोशनी का सत्कार करती है ” इन शब्दों का अर्थ होता है।  और अगर शब्दों का शाब्दिक अर्थ में में कहे तो इन शब्दों का अर्थ होता है मैं आपको प्रणाम करता हु। यह शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसमे नमस् : का अर्थ प्रणाम, श्रद्धा, आज्ञापालन वंदन और आदर होता है और ते: का अर्थ आपको होता है इस तरह से ये नमस्ते या नमस्कार शब्द बना है।

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आप और हम अक्सर ये देखते है की अगर कोई व्यक्ति हमारे यहाँ से जा रहा होता है तो हम उसे जाते समय दोनों हाथ जोड़े उनके सामने य मुद्रा बनाते है है जिसमे हमारे दोनों हाथ हमारे सीने के सामने दोनों हथेलिया एक दूसरे को छूती हुई तथा उंगलिया ऊपर की होती है इस स्थति और मुद्रा बनाकर हम बिना कुछ बोले हुए हम अपने मन में या फिर उनसे यही बोलते है। अगर खाने या भोजन की बात की जाए तो भारतीय व्यंजनों में हम लोग ज़्यदातर मसालों और जड़ी बूंटियो का परिस्कृत तथा और बहुत जयदा प्रयोग करते है। हमारे यहाँ पर कई तरीको के पकवान बनते है और इन पकवानो को बनाने के कई अलग अलग तरीके काम में लिए जाते है। और इनमे अच्छा खासा विन्यास होता है।

 

प्राचीन भारतीय कला // Indian Art And Culture Book Online

वैसे अगर देखा जाए तो हारे देश भारत में भारतीय व्यंजन या भोजन में ज्यादातर और महत्वपूर्ण रूप से शाकाहारी व्यंजनों का प्रयोग करते है। परन्तु अगर परम्परागत रूप से भारतीय भोजन की बात की जाए तो इसमें हम लोग मुर्गा, बकरा , मछली तथा और भी कई तरीको के मास का भी प्रयोग खाने में करते है। विवधता हमारे देश भारत के संस्कृति, भूगोल तथा भोजन की भारत की एक पारिभाषि कविशेषता रही है भारत में व्यंजन सब जगह एक जैसा नहीं बनता है यहाँ पर जगह के हिसाब से अलग आग प्रकार के भोजन बनते है और ये सब अलग अलग राज्यों या मुमहादिव्पो की विशेष संस्कृति और अलग अलग तरह की जनसांख्यिकी को प्रतिबिंबित भी करती है। वैसे तो साधारणतया भारतीय भोजन या वयंजनो को चार प्रकार की अलग अलग श्रेणियों में बांटे जा सकते है।

भारतीय कला एवं संस्कृति NCERT

जिसमे पहला है उत्तर में दूसरा है दक्षिण में, तीसरा है पूरब में, और अंतिम है पश्चिम दिशा में। इन सब में भारतीय भोजन की विभिन्नता होने के बावजूद भी ऐसे बहुत सारे सूत्र है जो विभिन्नता में एकता या एकीकृत करते है। एक अच्छे और स्वादिष्ट भोजन को तैयार करने के लिए उसमे भिन्न भिन्न प्रकार के मसालों का प्रयोग किया जाता है जिससे की भोजन का और जयदा स्वादिष्ट लगे और स्वादिष्ट लगने के साथ में अच्छी सुगंध भी आती है। जिससे हम उसे और भी अधिक चाव से भोजन करते है। अगर हम भारत के इतिहास के बारे में बात करे तो भारत के बाहर से भारत में आये भिन्न भिन्न प्रकार के सांस्कृतिक समूह के लोग जैसे की पारसी लोग , यूरोपीय शक्तियों तथा मुग़ल लोगो ने भी भारत में बनने वाले व्यंजन से बहुत अधिक प्रभावित हुए थे।

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भारतीय कला एवं संस्कृति प्रश्न उत्तर

भारतीय वस्त्र और वस्त्र धारण

अगर आप में से कोई त्रिपुरा के है तो आपको पता होगा की त्रिपुरा में जब भी कोई परम्परिक नृत्य महोत्स्व होता है तो उसमे भाग लेने के लिए वह की लड़किया एक बंदी लगाती है या प्रयोग करती है। हमारे देश भारत में महिलाये पारम्परिक रूप से साड़ी का प्रयोग , सलवार कमीज का प्रयोग, घागरा चोली (लेहंगा) और धोती का प्रयोग, कुरता और लुंगी का प्रयोग , ये सभी महिलाओ और पुरषो के पारम्परिक वस्त्र माने जाते है। मुंबई जिसे हम पहले बॉम्बे के आम से भी जानते थे वह हरे देश भारत देश की फैशन की राझणी भी मानी जाती है। परन्तु भारत देश में आज भी काफी ग्रामीण इलाको में ज्यादातर पारम्परिक वस्त्रो का प्रयोग किया जाता है वही पहने जाते है।

भारतीय कला एवं संस्कृति प्रश्न उत्तर 

अगर आपको फेंसी कपड़ो को पहनने के शौकीन है तो आप मुंबई, दिल्ली अहमदाबाद, चेन्नई, तथा पुणे इन सभी जगहों पर जाकर के खरीददारी कर सकते है। अगर हम दक्षिण के बात करे करे तो यहाँ पर पुरुष लोग सफ़ेद रंग का लम्बा चादर जैसे कपडे का उपयोग करते है या पहनते है। इस वस्त्र हो हम अंग्रेजी भाषा में धोती भी कहते है तथा इसी वस्त्र को तमिल भाषामे वेष्टि भी कहा जाता है और महिलाओ की बात की जाए तो महिलाये ज़्यदातर साड़ी पहनना पसंद करती है और पहनती है। ये साड़ी तरह तरह के रजंग बिरंगो वस्त्र तथा नमूनों जैसा एक सुन्दर दिखने वाला चादर जैसा वस्त्र होता है। इसके साथ फेंसी ब्लाउज या फिर साधारण वस्त्र साड़ी के ऊपर पहनती है। ये सब यहाँ की युवा महिलाओ तथा युवा लड़किया पहनना पसंद करती है और पहनती है।

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Art And Culture handwritten Notes

और छोटी छोटी लड़किया को पवाडा पहनाया जाता है। ये पवाडा एक प्रकार की लम्बी स्कर्ट होता है। जिसको ब्लाउज के निचे पहनना जाता है। महिलाओ के श्रृंगार में बिंदी की बहुत ही महत्वपूर्ण होती है तथा ये श्रृंगार का हिस्सा भी माना है। अगर बिंदी लगाने की परम्परागत बात की जाये तो हिंदी महिलाओ के द्वारा लाल रंग की बिंदी या सिंदूर मुख्य तोर पर शादीशुदा महिलाये ही लगाती है परन्तु आज के दौर में बिंदी महिलाओ के फैशन का एक हिस्सा बानी हुई है। भारत में पश्चिम पहनावों तथा भारतीय पश्चिम और उपमहाद्वीपों में फैशन का एक मिला जुला रूप है जिसमे चूड़ीदार वस्त्र , दुपटा , कुरता , गमछा का प्रयोग तथा मुन्दुम नोरियाथुम तथा शेरवानी का प्रयोग किया जाता है यानी की पहना जाता है ।

 

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