fbpx

Mahilao Ke Kanuni Adhikaar | महिलाओ के क़ानूनी अधिकारों की सूचि

0

महिलाओ के 28 क़ानूनी अधिकार / Mahilao Ke 50 Kanuni Adhikar In Hindi

Mahilao Ke 28 Kanuni Adhikaar In Hindi For UPSC:- क्या आप जानते है की महिलाओ के पास कोनसे कोनसे क़ानूनी अधिकार है। अगर नहीं तो आज की यह पोस्ट सिर्फ आपके लिए है क्यों की आज हमने स्पेशली महिलाओ को समर्पित किया है। आज हमने महिलाओ के लिए क़ानूनी अधिकार के इस स्पेशल लेख में  Women’s Rights In Indian Constitution In Hindi, Mahilao Ke Kanuni Adhikaar In hindi, The Indian Constitution Protects, Mahilao Ke Kanuni Adhikar In Hindi में आप महिलाओ के लिए और महिलाओ को जागरूक करने के लिए ये लेख तैयार किया है। इस लेख को पढ़ने के बाद आप सभी महिलाओ को भारत में महिलाओ के क़ानूनी अधिकार और महिलाओ के क़ानूनी अधिकार और अधिनियम, Mahilao Ke Kanuni Adhikaar में Mahilao Ke Kanuni Adhikaar तथा Mahilao Ke Kanuni Adhikaar List के बारे में पूरी जानकारी हो जाएगी।

Laws Against Women’s Rights | Women’s Legal Rights In India

Legal Rights Of Women In India:- और महिलाओ से जुड़े हुए काफी अधिकारों को बिंदुवार बनाकर आप सभी महिलाओ के क़ानूनी अधिकारों Women’s Rights In India 2020 और महिलाओं के अधिकार इन हिंदी  को हिंदी में आपके लिए उपलब्ध करवा दिए गए है। जिस से अब आपको समझने में कोई परेशानी नहीं होगी और आपको आसानी से समझ में आ सकेगा। क्यों की हमने इसको बिलकुल साधारण भाषा में महिलाओ से सम्बंधित कानून आपके सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। इन सभी अधिकारों और नियमो को जानना हर महिला के लिए बहुत जरुरी है। क्योकि बिना इन नियमो और अधिकारों की जानकारी के कोई महिला अपने अधिकार के लिए लड़ नहीं सकती और न ही अपना हक़ पा सकती है। इन सभी बातो को ध्यान में रखते हुए हमने महिलाओ के सशक्तिकरण क़ानूनी अधिकार, शादीशुदा महिला के अधिकार 2020, महिलाओं के सामाजिक अधिकार पर एक लेख लिखा है।

List of Women’s Human Rights || महिलाओ के क़ानूनी अधिकार पर निबंध

Mahilao Ke Kanuni Adhikaar | महिलाओ के क़ानूनी अधिकारों की सूचि

List Of Women Rights || Human Rights Of Women

महिलाओ के 28 क़ानूनी अधिकारों की सम्पूर्ण जानकारी

(1) – नियम नम्बर 1

हम अक्सर देखते है की ज़्यदातर महिलाये अपने साथ हुए बलात्कार और छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस में नहीं करती है क्योकि महिलाये पुलिस के द्वारा केश के दौरान की जा रही जांच और केश के दौरान अपमान से डरने की वजह से चुप रहती है और वह इसलिए वह पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाती है इसीलिए हाल ही में कुछ संशोधन करके सा नोटिफिकेशन जारी किया गया है

  • जो भी ऐसे मामले होंगे उनकी सुनवाई पुरुष जज के द्वारा नहीं बल्कि महिला जज के द्वारा की जाएगी ।
  • ऐसे केसो की सुनवाई 2 महीने के अनेर अंदर ही पूरी करने की कोशिश की जाएगी ।
  • ऐसे मामलो में पिडीत महिला के ब्यान किसी महिला के द्वारा और पीड़ित महिला के परिवार के लोगो की मौजूदगी में ही लिए जायेंगे ।

(2) – नियम नम्बर 2

हम अकसर पेपर में देखते पढ़ते है की छोटी छोटी मासूम बच्चियों के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार की मामले सामने आ रहे है ऐसे मामलो को अत्याधिक गंभीरता से लेते हुए सुप्रीमकोर्ट के द्वारा जनहित याचिक पर एक बहुत महत्वपूर्ण आदेश या निर्देश जारी किया है इसके अंतर्गत बच्चियों के साथ सेक्स या योन सम्बन्ध बनाने वाले या उनको वेश्यावृति के धंधे में धकेलने वाले लोगो के विरुद्ध बलात्कार के केश/ मुकदमे दर्ज किये जाएंगे । इसकी वजह यह है की चाइल्ड पोस्टिटिटूशन को बलात्कार के अपराध के बराबर ही अपराध माना है ।

(3) – नियम नम्बर 3

जैसा की आप सभी को पता है की बॉम्बे हाई कोर्ट के द्वारा एक मुकदमे में बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला / आदेश सुनाया है और फैसला लिया गया है की किसी पहली पत्नी को उसके पति के द्वारा दूसरा विवाह कर लेने पर दूसरी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करवा सकती है । और ना ही इस अपराध के लिए दूसरी पत्नी को दोषी ठहरा सकती है क्यों की यह बात ही नहीं कल्पित की जा सकती है की उसको इस बात का पता/जानकारी ही नहीं थी की वह पहले से शादीशुदा है।

(4) – नियम नम्बर 4

आज भी अन्य समुदाय या धर्मो की महिलाओ की तरह मुश्लिम धर्म की महिलाओ को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के अंतर्गत गुजाराभत्ता पाने का अधिकार रखती है । मुस्लिम महिला को भी अपने तलाक शुदा पति से तब तक गुजाराभत्ता पाने का अधिकार है वह दूसरी शादी नहीं कर लेती तब तक ही होता है। उदाहरण के लिए आप ( शाह बानो का केस) देख सकते है।

(5) – नियम नम्बर 5

अगर कोई अपराधी महिला है तो उस स्थति में उस महिला की डॉक्टरी जांच महिला डॉक्टर ही करेगी या फिर उस समय महिला डॉक्टर का पास में उपस्थित रहना जरुरी है ।

(6) – नियम नम्बर 6

अगर किसी महिला गवाह से पुलिस पूछताझ के लिए उस महिला को पुलिस स्टेशन में आने के लिए फोर्स/ जबरदस्ती नहीं कर सकती है । और जरुरत पड़ने पर पुलिस को उस महिला के घर ही जाना पड़ेगा ।

(7) – नियम नम्बर 7

अगर किसी पुलिस स्टेशन में किसी महिला से पूछताझ या तलाशी पुलिस ले रही तो उस दौरान वह पर किसी महिला कॉन्स्टेबल का उपस्थित होना बहुत जरुरी है ।

(8) – नियम नम्बर 8

अगर किसी केस में FIR दर्ज करती है तो उस FIR की एक कॉपी उस FIR कर्ता को देना पुलिस का कर्त्वय है ।

(9) – नियम नम्बर 9

किसी भी महिला को पूछताझ के लिए सूर्योदय के पहले और सूर्योदय के बाद में पुलिस स्टेशन में रोक नहीं सकते है ।

महिलाओ के जमीन जयदाद से जुड़े कुछ कानूनी अधिकार

(10) – नियम नम्बर 10

किसी भी विवाहित या फिर अविवाहित महिलाओ को अपने पिता की सम्पति में वह महिला भी संपत्ति में हिस्सा लेने की बराबर की हकदार होती है तथा उनकी विधवा बहु को भी अपने ससुर की संपत्ति एमए हिस्सा पाने की हकदार है और गुजाराभत्ता पाने की भी हकदार है।

(11) – नियम नम्बर 11

पति और पत्नी और दोनों की जो भी सम्पत्ति है उस पूरी सम्पत्ति के बंटवारे का अधिकार महिला के पास हिन्दू मरीज एक्ट 1955 के सेक्शन 27 के अंतर्गत है। और बंटवारे के मांग पत्नी के द्वारा की जा सकती है । और इसके अलावा महिला के अपने स्वयं के स्त्रीधन पर उस महिला का पूरा अधिकार रहेगा ।

(12) – नियम नम्बर 12

शायद आपको पता होगा की पहले महिलाओ के द्वारा सम्पत्ति में 1954 के हिन्दू मरीज एक्ट के तहत बंटवारे की मांग नहीं की जा सकती थी लकिन अब महिलाओ को कोपार्सनरी राइट के तहत अपने पुखो तथा अपने दादाजी के द्वारा अर्जित की गयी सम्पत्ति में अपना हिस्सा मांगने और पाने का पूरा पूरा अधिकार होता है । और यह कानून अब लगभग सभी राज्यों में लागू हो चूका है ।

Women’s Rights 2021 // Women’s Legal Rights

(13) – नियम नम्बर 13

यदि कोई महिला विवाहित है तो और उसे कोई बच्चा गोद लेना है तो उसमे पति और पत्नी दोनों की सहमति होना आवश्यक है।

(14) – नियम नम्बर 14

अब महिला को अपने बच्चो को स्कूल में एडमिशन( भर्ती ) करवाते समय पिता का नाम लिखना अनिवार्य / जरुरी नहीं है महिला यानी की बच्चे की माता ( माँ) बच्चे के पिता या फिर किस भी अभिभावक का नाम भी लिख सकती है । और यह पर्याप्त है ।

कामकाजी महिलाओ के क़ानूनी अधिकार

(15) – नियम नम्बर 15

महिला और पुरुष के एक समान कार्य करने पर महिला को पुरुष के बराबर वेतन ( तनख्वाह ) पाने का पूरा अधिकार है ।

(16) – नियम नम्बर 16

यदि किसी महिला के साथ ऑफिस ( जहा काम करती है ) वह पर किसी प्रकार का उत्पीड़न हो रहा है तो महिलाये उसकी शिकायत पुलिस में दर्ज करवा सकती है ।

(17) – नियम नम्बर 17

शाम 7 बजे के बाद अगर कोई महिला ऑफिस में नहीं रुकना चाहे तो उस महिला को 7 बजे के बाद बाध्य/जबरदस्ती नहीं रोक सकते है  चाहे उसको कंपनी में ओवरटाइम भी क्यों नहीं दिया जा रहा है ।

(18) – नियम नम्बर 18

किसी महिला को सुर्योदय से पहले यानी की सुबह 6 बजे से पहले तथा सूर्योदय समाप्त होने के बाद यानी की शाम 7 बजे के बाद ऑफिस में काम करने के लिए फाॅर्स/ बाध्य नहीं किया जा सकता है

(19) – नियम नम्बर 19

हम अक्सर देखते है की ऑफिस में महिलाओ को योन सम्बन्ध बनाने के लिए प्रस्ताव मिलता है और महिला के नहीं मानने पर उसको काम से निकाल दिया जाता है या फिर अन्य लाभों से वंचित कर दिया जाता है तो इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट रूल – 5, शेड्यूल 5 के तहत कार्यवाही करने का प्रावधान है ।

(20) – नियम नम्बर 20

कोई भी वयस्क विवाहित और अविवाहित महिला बच्चो को हिन्दू एडॉप्शन एन्ड सेक्शन एक्ट के तहत गोद ले सकती है।

(21) – नियम नम्बर 21

पत्नी अपने बच्चो के भरण – पोषण , उनकी शिक्षा और उनकी सुरक्षा आदि के लिए आवेदन/ निवेदन कर सकती है ।

लिवइन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला के क़ानूनी अधिकार 

(22) – नियम नम्बर 22

यह अधिकार उन महिलाओ के लिए है जो लिवइन रिलेशनशिप में रह रही है। यदि उनका पार्टनर लिवइन सम्बन्धो के दौरान अपने जीवनसाथी को मानसिक या शारीरिक रूप से पताड़ित करता है तो पीड़ित महिला पुलिस या कानून से घरेलु हिंसा कानून के तहत मदद ले सकती है। 

(23) – नियम नम्बर 23

जो कपल लिवइन रिलेशनशिप में है और इस लिवइन रिलेशनशिप सम्बन्धो के दौरान कोई संतान जन्म हो जाता है तो वह वेध मानी जाएगी और उस संतान को भी सम्पत्ति में अपना हिस्सा पाने का पूरा अधिकार होता है ।

(24) – नियम नम्बर 24

यदि किसी पुरुष की पहली पत्नी जीवित / जिन्दा है और उसके रहते पुरुष किसी और मैला के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रहा है तो उस स्थति में उस दूसरी महिला या पत्नी को भी गुजरा भत्ता पाने का पूरा अधिकार है। यह प्रावधान है पहली |

(25) – नियम नम्बर 25

स्त्री की डिलेवरी से पहले गर्भ में पल रहे बच्चे/ शिशु का लिंग पता करने वाले डॉक्टर को अपराधी घोषित कर दिया जायेगा। इसके साथ ही लिंग पता करने के बाद में स्त्री का गर्भपात करवाने के लिए दबाव / जबस्दस्ती  करने वाले पति और डॉक्टर दोनों को अपराधी माना जायेगा । तथा लिंक जांचने वाले डॉक्टर को कारावास (3-5 वर्ष ) और जुर्माना (10-15 ) हजार रूपये का लगाया जा सकता है । और दूसरे अन्य रिस्तेदार तथा पति जो गर्भपात के लिए दबाव डाल रहे हो उनके लिए भी अलग अलग सजा का प्रावधान होता है ।

(26) – नियम नम्बर 26

लिवइन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला को वही दर्जा मिलता/ प्राप्त होता है जो की किसी विवाहित स्त्री को दर्जा मिलता है।

तलाक के बाद पत्नी के अधिकार

(27) – नियम नम्बर 27

किसी भी सहादशुदा महिला तलाक की दायर याचिका पर हिन्दू मैरिज एक्ट के सेक्शन 24 के अंतरगत गुजाराभत्ता देने की मांग कर सकती है और ले सकती है। और तलाक लेने के आखिरी निर्णय का पश्चात सेक्सन 25 के अंतर्गत हमेशा के लिए एलिमनी लेना का प्रावधान होता है अगर विधवा बहु है और उस विधवा बहु की दूसरी शादी नहीं की गयी है तो वह विधवा बहु अपने ससुर से गुजाराभत्ता/ मेंटिनेंस प्राप्त करने का अधिकार है यह प्रावधान है। और इतना ही नहीं पत्नी को जो गुजाराभत्ता मिलता है और वह उसे कम लगता है तो भी वह अपने पति को और ज्यादा पैसे देने के लिए पाबन्द करवा सकती है। यह भी है की गुजाराभत्ता का प्रावधान एडॉप्शन एन्ड मेंटिनेंस एक्ट में भी शामिल है ।

(28) – नियम नम्बर 28

पत्नी को भरण – पोषण जो भी आवश्यक होता है उसका अधिकार उसके पास है और यह सब सी | आर | पी | सी के सेक्सन 125 के तहत मेंटिनेंस में आता है इसमें आपको यह जानकारी प्राप्त होना बहुत जरुरी है की जैसे हिन्दू महिलाओ को जो भी यह सारे अधिकार मिले हुए है बिलकुल वैसे ही या उसके समकक्ष या समानांतर अधिकार दूसरी महिलाओ जैसे की जो हिन्दू धर्म में नहीं आती है उस सभी को उनके पर्सनल Low/ कानून में उपलब्ध है जिनक वह जब चाहे प्रयोग या उपयोग में ले सकती है ।

मेरे साथियो इसके आगे के अधिकार आपको जल्दी ही उपलब्ध करवा दिए जायेंगे ।

Women’s Rights

मित्रो इस लेख में हमने जितना संभव हुआ उतना महिलाओ के आधिकारो के बारे में जानकारी साझा की अगर इसमें हमसे कोई त्रुटि रह गयी  तो हमें Comment Box में या फिर mail करके सूचित करे धन्यवाद।

Leave A Reply

Your email address will not be published.